सावन का महीना चल रहा था !!! झमाझम बारिश हो रही थी !!
पण्डित मुरलीधर की शिकार खाने की इच्छा तीव्र होती जा रही थी !!! कि काश ! दो चार पीस शिकार के मिल जाते तो इस मन को सन्तोष मिलता !!! बोतल तो जजमान की दी हुई हर समय अलमारी में रहती ही थी !!
पण्डित जी रुड़की में अभी दो चार सालों से रह रहे थे !! इतने कम समय मे अच्छी जजमानी बना ली थी !!! पण्डित जी रुड़की में अकेले ही रहते थे !!! काफी देर इसी विषय पर चिंतन करते रहे कि ...कैसे शिकार का इंतज़ाम हो ?? तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया तो दो महिलाएं थी...उन्होंने प्रणाम किया और बताने लगी ...क्या करें पण्डित जी ?? बहुत परेशानी में हैं ...बच्चा दो दिन से दूध नही पी रहा है ...और हमें लगता है किसी की नजर लग गयी है !! कुछ समाधान कीजिये ???
पण्डित जी ने आंखे बंद की और कुछ बुदबुदाने लगे ...फिर बोले...आपके आस पड़ोस में क्या कोई विधवा महिला रहती है ?? !! दोनो महिलाएं एक सुर में बोली हाँ हाँ पण्डित जी रहती है ..!!!! पण्डित जी बोले ये उसी की नजर है !!!! महिलाएं बोली कुछ समाधान करवा दीजिये ...!!! पण्डित जी बोले ...ये बहुत ही गहरी काली नजर है ....इसके लिए आपको कुछ सामाग्री लानी पड़ेगी ...काले तिल, काली दाल, काली मुर्गी या काली बकरी का मांस , काले अंगूर, काली चंदन, काले जौ, काला घी, लाना पड़ेगा !!! महिलाएं बोली माहराज..बाकी तो सब हो जाएगा पर ये काली चंदन, काला जौ, काला घी पहली बार सुना , कहाँ से मिलेगा ये ?? पण्डित जी बोले ये मेरे पास हैं !!!
आज शनिवार भी है तो आज ही इस पूजा को सम्पन्न करना पड़ेगा !! महिलाओ ने फटाफट घर मे फोन किया और बच्चे के पिता को सामान लाने के लिए कहा !!!
कुछ देर बाद पूजा शुरू हुई ..यज्ञ हुआ और राख की पुड़िया उनको दे दी !!! अब पण्डित जी ने चुपके से बच्चे की माँ को कहा ...आप पे तो बहुतों की काली नजर है , क्योंकि आप बेहद खूबसूरत हैं , इसलिए आप पे झट से नजर लग जाती है , खूब सुरमा लगाइए , इससे नजर नही लगगी !!! ऐसा सुनते ही महिला ने पर्स से तीन बन्दी वाला नोट निकाला और पण्डित जी की मुठ्ठी में रख दिया !!!
वो लोग चले गए , पण्डित जी ने फटाफट बोतल निकाली और किचन में कड़ाई में मुर्गा पकाने लगे !! पेग पीने लगे और घर मे फोन करते हुए बीबी को बताने लगे....अभी अभी फेक्ट्री से ड्यूटी करके आ रहा हूँ यार, आज काम भी बहुत था !!! फिर मुर्गा पकाते हुए सुरीले अंदाज में गाने लगा..... केल बजे मुरुली... ऊंची ऊंची डांडयो मा.......!!!!!
दरअसल आज से पांच साल पहले तक मुरली की बहादराबाद फेक्ट्रीयों में काम करते करते मुरली बजी हुई थी !! बहुत परेशान रहता था !!! तनखा भी आठ दस हज़ार थी...तंगी में जीवन था !!! फिर धीरे धीरे हरिद्वार के मन्दिरो में जाकर पूजा पाठ की विधियां देखकर सीख ग़या !!! जाति से ब्राह्मण भले ही न हो पर ब्राह्मणों वाला स्टाइल सीख ग़या था !!
रुड़की में पहाड़ियों की बढ़ती संख्या से उसने रुड़की से ही इस नए व्यवसाय की नींव रख दी थी !!!!!! बातों का जादूगर था !! और दो चार रटे रटाये श्लोक भी बहुत ही लय से बोलता था.... !!! जजमान भी खुश थे ...और मुरली बेहद खुश था !!!!
जारी-- नवल खाली
source:- https://www.facebook.com/bhartukibvaari/
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